एसओपी/एनडीएमए
भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली ‘नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी’ (NDMA) भारत में आपदा प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी संस्था है। ‘डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005’ के तहत NDMA का गठन करना और राज्य व ज़िला स्तर पर संस्थागत व्यवस्थाओं के लिए अनुकूल माहौल बनाना ज़रूरी है।
NDMA का विज़न
“एक ऐसी समग्र, सक्रिय, तकनीक-आधारित और टिकाऊ विकास रणनीति के ज़रिए एक सुरक्षित और आपदा-रोधी भारत बनाना, जिसमें सभी संबंधित पक्ष शामिल हों और जो बचाव, तैयारी और आपदा के असर को कम करने की संस्कृति को बढ़ावा दे।”
स्कूल सुरक्षा का मतलब है बच्चों के लिए उनके घर से स्कूल जाने और वापस आने तक सुरक्षित माहौल बनाना। इसमें भू-वैज्ञानिक/जलवायु संबंधी प्राकृतिक खतरों, इंसानों द्वारा पैदा किए गए जोखिमों, परिवहन और अन्य संबंधित आपातकालीन स्थितियों से सुरक्षा शामिल है।
स्थानीय स्तर पर तैयारी और प्रतिक्रिया
1. स्कूल ने सुरक्षा के लिए एक नोडल टीचर (focal point teacher) नियुक्त किया है।
2. स्कूल ने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को जागरूक किया है।
3. स्कूल ने पीयर एजुकेटर्स (साथी शिक्षकों/छात्रों) का एक समूह तैयार किया है।
स्कूल आपदा प्रबंधन योजना में शामिल हैं:
1. चेतावनी देने की व्यवस्था (सेंट्रलाइज़्ड PA सिस्टम)
2. सुरक्षित बाहर निकलने के रास्तों की पहचान
3. आपातकालीन वाहनों के आने-जाने की सुविधा
4. विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों की देखभाल
5. आपातकालीन उपकरणों का स्टॉक रखना और उनकी नियमित देख-रेख
6. आपातकाल के दौरान छात्रों को व्यवस्थित रूप से बाहर निकालने की व्यवस्था
7. साइट का नक्शा जिसमें बाहर निकलने के रास्ते और इकट्ठा होने की जगहें दिखाई गई हों
आतंकवादी हमलों से निपटने के लिए SOP (मानक संचालन प्रक्रिया)
विद्यालय द्वारा किए गए बचाव के उपाय
1. विद्यालय की इमारत के चारों ओर बाउंड्री वॉल
2. आपातकालीन नंबरों का प्रदर्शन
3. बाउंड्री के चारों ओर रोशनी की व्यवस्था
4. CCTV कैमरे
5. सेंट्रलाइज़्ड PA सिस्टम
6. अलार्म सिस्टम